UK 10TH ENGLISH

UK Board 10th Class English – (Supplementary Reading) – Chapter 7 The Necklace

UK Board 10th Class English – (Supplementary Reading) – Chapter 7 The Necklace

UK Board Solutions for Class 10th English – (Supplementary Reading) – Chapter 7 The Necklace

Read and Find Out – 1
(पढ़ो और ढूँढो)
Q. 1. What kind of a person is Mme Loisel-why is she always unhappy?
(मैडम लौसेल किस प्रकार की महिला है – वह सदैव अप्रसन्न क्यों रहती है? )
Ans. Madam Loisel is a pretty young lady. She is always dissatisfied with her life. She was married with a clerk. She gives much importance to her dreams. She always overlooks the realities of life. So, she is always dissatisfied because dreams can’t be turned as reality.
(मैडम लौसेल एक सुन्दर युवा महिला है। वह अपने जीवन से सदैव असन्तुष्ट है। उसका विवाह एक क्लर्क से हुआ है। वह अपने सपनों को बहुत महत्त्व देती है। वह सदैव जीवन की वास्तविकताओं को नजरअन्दाज करती है। अत: वह हमेशा असन्तुष्ट रहती है क्योंकि सपने सच नहीं हो सकते।)
Q.2. What kind of a person is her husband ?
(उसका पति कैसा इन्सान है ? )
Ans. Her husband is very simple person. He loves his wife whole-heartedly. He is a caring husband. He wants to see Mrs Loisel happy.
(उसका पति बहुत सरल व्यक्ति है। वह अपनी पत्नी को सम्पूर्ण रूप से प्रेम करता है। वह ध्यान रखने वाला पति है। वह श्रीमती लौसेल को प्रसन्न देखना चाहता है। )
Read and Find Out – 2
(पढ़ो और ढूँढो)
Q.1. What fresh problem now disturbs Mme Loisel?
( कौन-सी नई समस्या अब मैडम लौसेल को परेशान करती है? )
Ans. Now the fresh problem is that Mme Loisel doesn’t have a good and proper dress for party.
( अब मैडम लौसेल के सम्मुख नई समस्या पार्टी के लिए अच्छी और उचित ड्रेस का न होना है।)
Q.2. How is the problem solved ?
( समस्या कैसे हल हुई ? )
Ans. The problem is solved when her husband gives her four hundred francs. This sum was for to buy a good dress.
(समस्या का समाधान तब हुआ जब उसके पति ने चार सौ फ्रेंक दिए । यह धनराशि अच्छी ड्रैस खरीदने के लिए थी । )
Read and Find Out – 3
(पढ़ो और ढूँढो)
Q.1. What do M and Mme Loisel do next ?
(मिस्टर और मैडम लौसेल ने आगे क्या किया ? )
Ans. Mr and Mme Loisel decide to borrow a diamond necklace. It is from her friend.
(मिस्टर और मैडम लौसेल ने हीरों का एक हार उधार लेने का निर्णय लिया। यह उनके मित्र का था। )
Q.2. How do they replace the necklace ?
( वह हार को कैसे वापस करते हैं ? )
Ans. To return the lost necklace both of them had to work hard. They borrowed money and even used the money left by Mr. Loisel’s father. The necklace was bought for 36,000 francs and given back to Mrs Forestier.
(खोए हुए हार को वापस करने के लिए दोनों ने कठोर परिश्रम किया। उन्होंने धन उधार लिया और मिस्टर लौसेल के पिता जी द्वारा छोड़े गए धन का भी उपयोग किया गया। छत्तीस हजार फ्रेंक में हार खरीदा गया और श्रीमती फारेस्टर को लौटाया गया। )

SUMMARY OF THE LESSON

Matilda was a very pretty young lady. She was born as if through an error of destiny, into a family of clerks. She was married to a petty clerk in the office of the Board of Education. She was simple, but she was not happy.
One evening her husband returned elated bearing in his hand a large envelop. He said, “Here is something for you.”
She quickly drew out a printed card which read:
“The Minister of Public Instruction and Madame George Ramponneau ask the honour of Mr, and Mme Loisel’s company, Monday evening, January 18, at the Minister’s residence.”
It did not delight her. She looked at him with an irritated eye and said, “What do you suppose I have to wear to such a thing as that?”
Her husband gave her four hundred francs for the costume. Her dress was nearly ready but she was vexed not to have a jewel.
On the advice of her husband she borrowed a necklace from her friend Madame Forestier who studied with her in the college.
The day of the bad arrived. Mme Loisel was a great success. She danced with enthusiasm, intoxicated with pleasure. She won a lot of admiration.
They returned home about four o’clock in the morning. She removed the wraps from her shoulders before the glass. Suddenly she screamed. Her necklace was not around her neck.
They looked for the necklace everywhere but they didn’t get it. It was decided that they must replace that jewel.
They found a chaplet of diamonds in a shop. It was valued at forty thousand francs. But they could get it for thirty-six thousand. Loisel had eighteen thousand francs. He borrowed the rest from lenders.
Mme Loisel went to Mme Forestier and returned the jewel. But the latter did not perceive it and kept the box as such.
This event changed the life of the Loisels. They worked hard and repair the debt in ten years.
One Sunday Mme Loisel came across Mme Forestier in a park. She approached Mme Forestier, “Good morning, Jeanne.” She was surprised to see a changed Matilda. And she said that her necklace was false and it was not worth over five hundred francs.

सम्पूर्ण पाठ का हिन्दी रूपान्तर

हार
मंटिल्डा को एक शानदार पार्टी में आमन्त्रित किया जाता है। उसके पास सुन्दर वेशभूषा है पर आभूषण नहीं। वह एक मित्र से हार उधार लेती है। तब क्या होता है?
वह उन सुन्दर, युवा महिलाओं में से एक थी जो नियति की भूल से लिपिकों के एक परिवार में पैदा हुई थी। उसके पास दहेज के रूप में ले जाने के लिए कुछ धन-सम्पत्ति नहीं थी, कोई आशाएँ नहीं थीं, उसके पास कोई ऐसा साधन नहीं था जिससे वह प्रसिद्ध, प्रिय बनती और किसी धनी या सुविख्यात आदमी से विवाह करती; अतः उसे शिक्षा परिषद् के कार्यालय में एक मामूली लिपिक से विवाह करना पड़ा। वह साधारण थी पर वह प्रसन्न नहीं थी ।
वह निरन्तर रूप से पीड़ित रहती थी, वह यह महसूस करती थी कि उसका जन्म सभी नाज़ुक चीज़ों और विलासिता की वस्तुओं को पाने के लिए हुआ है। वह अपने घर की गरीब हालत, जीर्ण-शीर्ण दीवारों और पुरानी कुर्सियों से दुःखी रहती थी। ये सब चीजें उसको वेदना पहुँचाती थीं और क्रुद्ध करती थीं।
जब वह अपने पति के सामने भोजन करने के लिए बैठती थी और उसका पति प्रसन्नतापूर्वक डोंगे का ढक्कन हटाता और कहता, “ओह! बहुत अच्छा शोरबा है। मैंने इससे अच्छा और कोई नहीं देखा……..।” वह शानदार रात्रिभोज, चाँदी के चमकते हुए बर्तनों के बारे में सोचा करती थी, वह उत्कृष्ट भोजन जो अनोखी प्लेटों में परोसा हुआ हो, के बारे में सोचा करती थी। उसके पास न तो गाउन थे और न ही आभूषण थे, कुछ नहीं था। और उसे केवल वे ही चीज़ें प्रिय थीं।
उसकी एक धनी मित्र थी जो उसके साथ कोन्वेन्ट में पढ़ती थी, अब वह उसके पास जाना पसन्द नहीं करती थी- वह जब उसके घर से वापस आती थी, वह बहुत दुःखी होती थी। वह निराश होकर पूरे दिन रोया करती थी। ‘
एक दिन शाम को उसका पति फूलकर कुप्पा होकर घर लौटा, उसके हाथ में एक बहुत बड़ा लिफाफा था।
उसने कहा, “यहाँ आओ। यहाँ तुम्हारे लिए कोई चीज़ है ।”
मटिल्डा ने फुर्ती से एक छपा हुआ कार्ड बाहर निकाला जिस पर ये शब्द अंकित थे : “शिक्षा मन्त्री और श्रीमती जॉर्ज रैमपोनी अपने निवास पर 18 जनवरी सोमवार की संध्या को श्री और श्रीमती लौसेल की उपस्थिति का सम्मान प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं।”
प्रसन्न होने के बजाय, जैसा कि उसके पति को आशा थी, उसने दुर्भावना से निमन्त्रण पत्र मेज़ पर फेंका और बड़बड़ाई, “आप क्या सोचते हैं मैं इसका क्या करूँ?”
“पर, मेरी प्रिय, मैंने सोचा था कि इससे तुम प्रसन्न होगी। तुम कभी बाहर नहीं जाती, और यह एक अवसर है, और सुन्दर अवसर है! प्रत्येक व्यक्ति ऐसे अवसर को चाहता है, यह निमन्त्रण इने-गिने लोगों को दिए गए हैं, कर्मचारियों को बहुत नहीं दिए गए हैं। तुम वहाँ अफसरों की सम्पूर्ण दुनिया देखोगी ।’
मटिल्डा ने क्रुद्ध दृष्टि से उसकी ओर देखा और बेचैनी से कहा, “तुम क्या सोचते हो मैं ऐसे अवसर पर क्या पहनूंगी?”
लौसेल ने इसके बारे में सोचा भी नहीं था, वह रुक रुक कर बोला, “क्यों, वह ड्रेस तो है जो तुम पहनती हो जब हम थियेटर जाते हैं। मुझे तो वह बहुत सुन्दर लगती है ………।” वह चुप था, सहमा हुआ था, अपनी पत्नी को रोते देखकर निराश था। उसने रुक-रुक कर कहा, “क्या बात है? क्या बात है?”
गहरे प्रयास से उसने अपनी नाराज़गी पर नियन्त्रण किया और अपने भीगे गालों को पोंछते हुए शान्त आवाज़ में उत्तर दिया, “मेरे पास कुछ नहीं है। मेरे पास एक भी ड्रेस नहीं है और फलतः मैं पार्टी में नहीं जा सकती। अपना कार्ड किसी साथी को दे दो जिसकी पत्नी मुझसे बेहतर योग्य हो ।”
वह दु:खी था, पर उसने उत्तर दिया, “मटिल्डा, आओ देखें, नृत्य के लिए उपयुक्त वेशभूषा पर क्या मूल्य आएगा, ऐसी चीज़ जो अन्य अवसरों पर भी काम आए, कोई चीज़ जो बहुत साधारण हो ?”
मटिल्डा ने कुछ क्षण विचार किया, उसने ऐसी धनराशि के बारे में सोचा जिसके लिए तुरन्त मनाही न हो और मितव्ययी लिपिक भयभीत होकर न चिल्लाए ।
अन्त में उसने झिझकते हुए कहा, “मैं बिलकुल ठीक तो नहीं बतला सकती, पर मुझे लगता है कि वह ड्रेस चार सौ फ्रेंक तक आ जाएगी।”
लौसेल पीला पड़ गया, क्योंकि उसने यह धनराशि एक बन्दूक खरीदने के लिए बचाई थी तांकि वह अगली ग्रीष्म में कुछ शिकारी पार्टियों में सम्मिलित हो सके, कुछ मित्रों के साथ जो रविवार को लावा पक्षियों का शिकार करने जाते हैं। फिर भी, उसने उत्तर दिया, “बहुत अच्छा, मैं तुमको चार सौ फ्रेंक दूंगा। पर एक सुन्दर ड्रेस लेने का प्रयत्न करो। “
बॉल नृत्य का दिन आ गया और श्रीमती लौसेल दुःखी प्रतीत हुई, वह असंयमित और व्याकुल थी। फिर भी उसकी ड्रेस लगभग तैयार थी। एक दिन शाम के समय उसके पति ने उससे कहा, “तुम्हें क्या परेशानी है? तुम दो या तीन दिन से असामान्य आचरण कर रही हो ।”
और उसने उत्तर दिया, “मैं इस बात से दुःखी हूँ कि मेरे पास सज्जा के लिए एक भी आभूषण नहीं है। मैं दरिद्रता का शिकार नज़र आऊँगी। अच्छा यह होगा कि मैं पार्टी में न जाऊँ।”
उसने उत्तर दिया, “तुम कुछ प्राकृतिक फूल पहन सकती हो। इस मौसम में वे बहुत फैशनेबिल लगते हैं। “
वह सन्तुष्ट नहीं थी। उसने उत्तर दिया, “नहीं, इससे अधिक और कोई अपमानजनक बात नहीं है कि मैं धनी स्त्रियों के बीच गन्दा प्रदर्शन करूँ।”
तब उसका पति चिल्ला उठा, “हम कितने मूर्ख हैं! अपनी मित्र श्रीमती फोरेस्टीयर के पास जाओ और उससे उसका ज़ेवर उधार ले लो।”
मटिल्डा ने प्रसन्नता से चीख मारी, “यह ठीक है! मैंने यह सोचा भी नहीं था । “
अगले दिन मटिल्डा अपनी मित्र के घर गई और उसको अपनी निराशा की कहानी सुनाई। श्रीमती फोरेस्टीयर अपनी अलमारी के पास गई, एक बड़ा जेवर का बक्स निकाला, उसको मटिल्डा के पास लाई, उसको खोला और कहा, “मेरी प्रिय, पसन्द कर लो।”
सबसे पहले मटिल्डा ने कुछ कंगन देखे, तब मोतियों का एक हार, तब सोने का वेनिसी क्रॉस और सराहनीय कारीगरी वाले मूल्यवान नगीने देखे। उसने दर्पण के सामने आभूषणों को पहन कर देखा, वह झिझकी, पर वह यह निर्णय नहीं ले सकी कि क्या लूँ और क्या छोहूँ। तब उसने कहा, “क्या आपके पास कुछ और नहीं है?”
“हाँ, क्यों नहीं, तुम स्वयं ही देखो। मैं नहीं जानती तुम्हें क्या अच्छा लगेगा।”
अकस्मात ही मटिल्डा ने काली शाटन के बक्स में हीरों का अति उत्तम हार देखा। जैसे ही उसने हार बाहर निकाला उसके हाथ काँपे । उसने अपनी ड्रेस पर हार को अपने गले पर रखा और भाव विभोर हो गई। तब उसने झिझकते हुए पूरी उत्सुकता से पूछा, “क्या आप मुझे यह उधार देने की कृपा करेंगी? केवल यह?”
“हाँ, क्यों नहीं, निश्चित रूप से।”
मटिल्डा अपनी सहेली के गले लग गई, प्रसन्नता से उसका आलिंगन किया, तब वह अपना खजाना ( हीरों का हार) लेकर चलती बेनी ।
नृत्य का दिन आ गया। श्रीमती लौसेल को विशेष सफलता मिली। वह सभी स्त्रियों में सबसे अधिक सुन्दर थी— उत्कृष्ट, आकर्षक मुस्कान वाली और उत्साह से पूर्ण। सभी आदमियों ने उसकी ओर ध्यान से देखा, उसका नाम पूछा, और उससे परिचय पाने की कोशिश की।
वह उत्साह से नाची, आनन्द के मद में नाची, उसने सराहना के अतिरिक्त कुछ और नहीं सोचा। उसकी सफलता पूर्ण थी जो उसके हृदय को प्रिय थी।
मटिल्डा प्रातः चार बजे के लगभग घर गई। उसका पति आधी रात से एक छोटे स्टोर में आधी नींद ले चुका था, उसके साथ तीन और सज्जन भी सोए हुए थे जिनकी पत्नियाँ नृत्य का अति आनन्द ले रही थीं।
उसके पति ने उसके कन्धों पर एक छोटा शाल डाला जिसको वे अपनी साथ लाए थे। उस शाल की दरिद्रता नृत्य की वेशभूषा के लालित्य से टकरा रही थी। वह जल्दी ही निकलना चाहती थी ताकि अन्य स्त्रियाँ उसको न देख सकें जो कीमती रोयेंदार शाल लपेटे हुए थीं।
लौसेल ने उसको रोका उसने कहा, “प्रतीक्षा करो, मैं एक घोड़ा गाड़ी बुलाकर लाता हूँ।” पर उसने उसकी बात नहीं सुनी और तेज़ी से सीढ़ियों से नीचे उतर आई। जब वे सड़क पर आए, उनको कोई सवारी नहीं मिली, तब वे एक गाड़ी की खोज करने लगे, उन्होंने कोचवानों को आवाज़ लगाई जो कुछ दूरी पर दिखाई देते थे।
वे निराश होकर और सर्दी से काँपते हुए नदी की ओर पैदल चले। अन्त में उन्हें एक पुरानी घोड़ा गाड़ी मिली जो रात में पेरिस में देखी जाती है।
वह गाड़ी उनको उनके घर के दरवाज़े तक ले गई और वे थके हुए अपने घर में गए। मटिल्डा के लिए सब कार्यक्रम समाप्त हो चुका था और लौसेल को स्मरण हुआ कि उसे दस बजे तक आफिस में पहुँचना होगा।
उसने अपने कन्धों के ऊपर से शाल उतारा और दर्पण के सामने अपने गौरव की अन्तिम छवि देखी। अचानक ही उसके मुँह से चीख निकली। उसका हार उसके गले में नहीं था ।
लौसेल ने, जो पहले ही अपने आधे वस्त्र उतार चुका था, पूछा, “क्या बात है?”
वह उत्तेजना से उसकी ओर घूमी, “मेरे पास…….मेरे पास……मेरे पास अब श्रीमती फोरेस्टीयर का हार नहीं रहा । “
वह निराशा से उठा, “क्या! यह कैसे हुआ? यह सम्भव नहीं है।”
और उन्होंने वस्त्रों की तहों में देखा, चोगे की तहों में देखा, जेबों में और सब जगह देखा। वे उसे ढूंढ नहीं सके ।
लौसेल ने पूछा, “क्या तुम्हें विश्वास है कि जब हम मन्त्री के निवास से चले उस समय तुम हार पहने थीं?”
“हाँ, जैसे ही हम बाहर आए, मैंने उसको छुआ था । “
” पर यदि तुमने उसे सड़क पर खोया है, हमें उसके गिरने की आवाज सुननी चाहिए थी। वह गाड़ी में होना चाहिए ।”
“हाँ, यह सम्भव है। क्या तुमने गाड़ी का नम्बर नोट किया था?”
“नहीं! और क्या तुमने नोट किया था, क्या तुमने ध्यान से देखा था कि गाड़ी कैसी थी ?”
“नहीं।’
पूरी तरह से दुःखी होकर उन्होंने एक-दूसरे की ओर देखा । अन्ततः लौसेल ने पुनः वस्त्र पहने।
उसने कहा, “मैं उस रास्ते पर जा रहा हूँ जहाँ हम पैदल चले थे, यह देखने के लिए कि क्या हम उसे प्राप्त कर सकते हैं। “
और वह चला गया। मटिल्डा रात के गाउन में रही, उसमें इतनी शक्ति नहीं थी कि वह बिस्तर पर चली जाए।
उसका पति लगभग सात बजे लौटकर आया। उसे कुछ नहीं मिला।
वह पुलिस स्टेशन गया और घोड़ा-गाड़ियों के दफ्तरों में गया और इनाम घोषित करते हुए उसने समाचार-पत्रों में विज्ञापन निकाला ।
इस भयानक और अचानक दुर्घटना से पहले वह घबराहट की स्थिति में प्रतीक्षा करती रही। लौसेल शाम को वापस आया, उसका चेहरा पीला था, उसे कोई चीज़ नहीं मिली।
उसने कहा, “अपने मित्र को लिखो कि तुमसे हार का जोड़ टूट गया है और तुम्हें उसकी मरम्मत करानी होगी। इससे हमें समय मिल जाएगा।”
जैसा लौसेल ने इमला बोला, वैसा ही मटिल्डा ने लिखा ।
एक सप्ताह के अन्त में, उसकी सारी आशाएँ नष्ट हो गईं और लौसेल ने जो पाँच वर्ष बड़ा था, कहा, “हमें इसके स्थान पर दूसरा जेवर खरीदना चाहिए। “
पैलिस-रोयल की दुकान में उनको हीरों की एक माला मिली जो उनको ठीक वैसी ही प्रतीत हुई जैसे उन्होंने खोई थी । उसका मूल्य चालीस हज़ार फ्रेंक था। वे उसको छत्तीस हजार में खरीद सके।
लौसेल के पास अठारह हज़ार फ्रेंक थे, जो उसके पिता ने उसके नाम छोड़े थे। शेष राशि उसने उधार ली। उसने विनष्टकारी वादे किए, उसने सूदखोरों से पैसा लिया और उधार देने वालों की पूरी बिरादरी से पैसा लिया। तब वह नए हार को लेने गया, उसने व्यापारी के काउन्टर र छत्तीस हजार फ्रेंक जमा किए।
जब श्रीमती लौसेल जेवर श्रीमती फोरेस्टीयर के पास ले गईं, तो उसने मटिल्डा से रूखे स्वर में कहा, “तुम्हें उनको मेरे पास और पहले वापस कर देना चाहिए था, मुझे उनकी आवश्यकता पड़ सकती थी।”
श्रीमती फोरेस्टीयर ने जेवर का डिब्बा नहीं खोला जैसे श्रीमती लौसेल को डर था कि वह खोलेगी। जब वह बदले हुए हार को देखेगी तो वह क्या सोचेगी? वह क्या कहेगी? क्या वह मटिल्डा को डाकू के रूप में देखेगी?
श्रीमती लौसेल को अब ज़रूरत के दुःखद जीवन का पता चला। फिर भी उसने अपनी भूमिका पूरी तरह से और वीरता से निभाई। यह भयानक ऋण चुकाना आवश्यक था। वह उसका भुगतान करेगी। उन्होंने नौकरानी को हटा दिया, उन्होंने अपना निवास बदल दिया, उन्होंने दुछत्ती में कुछ कमरे किराए पर लिए ।
उसने रसोई का अत्यधिक अप्रिय कार्य सीखा। उसने तश्तरियाँ साफ कीं। उसने गन्दी लिनने, अपने कपड़े, बर्तन साफ करने के कपड़े धोए जिनको वह सूखने के लिए तार पर डालती थी। वह प्रत्येक दिन सुबह को कूड़ा गली में डालती थी और पानी ऊपर लाती थी, पानी लाते हुए वह हर सीढ़ी पर साँस लेने के लिए रुकती थी और साधारण स्त्री के समान कपड़े पहनती थी। वह अपने हाथ में टोकरी लेकर खरीदारी करने के लिए कुँजड़े, कसाई और फल विक्रेता की दुकान पर जाती थी और मुसीबत से कमाए अपने धन के अन्तिम सू के लिए सौदेबाजी करती थी।
पति शाम को किसी व्यापारी की हिसाब-किताब की बहियों को साफ-सुथरे ढंग से लिखता था, और रात में वह पाँच सौ प्रति पृष्ठ नकल किया करता था और यह जीवन दस वर्ष चलता रहा। दस वर्ष के अन्त में, उन्होंने सब ऋण चुका दिया।
अब श्रीमती लौसेल बूढ़ी लगती थी। वह मज़बूत, कठोर परिश्रम करने वाली औरत हो गई थी, वह गरीब गृहस्थी में कठोर कार्य करनी वाली स्त्री बन गई थी। उसके बाल बुरी तरह से बने होते थे, उसकी लहंगी उलटी-पुलटी रहती थी, उसके हाथ लाल हो गए थे, वह ऊँचे स्वर में बोलती और कमरे के फर्शो को पानी की बड़ी-बड़ी बाल्टियों से धोती थी। पर कभी-कभी, जब उसका पति कार्यालय में होता था, वह खिड़की के सामने बैठ जाया करती थी और पहले समय की शाम की पार्टी के बारे में, वह उस बॉल नृत्य के बारे में सोचा करती थी जहाँ वह बहुत सुन्दर लगती थी और झूठी प्रशंसा सुनती थी।
यदि हार न खोया जाता तो कैसा रहता? कौन जानता है? जीवन कितना महत्त्वपूर्ण है, और उसमें कितने परिवर्तन आते हैं एक छोटी-सी चीज़ किसी को किस प्रकार बर्बाद कर देती है और बचाती है।
एक रविवार को वह सप्ताह की चिन्ताओं से मुक्ति पाने के लिए जब चैम्पस इलिसीज़ में घूम रही थी, उसने अकस्मात एक स्त्री बच्चे के साथ घूमती देखी। वह श्रीमती फोरेस्टीयर थी, वह अब भी जवान थी, अब भी सुन्दर थी, अब भी आकर्षक थी। श्रीमती लौसेल प्रभावित हुई। क्या उसे श्रीमती फोरेस्टीयर से बात करनी चाहिए? हाँ, निश्चित रूप से और अब तो उसने सब कुछ भुगतान कर दिया है, वह उसको सब कुछ बतला सकती है। क्यों नहीं?
मटिल्डा उसके पास गई, “जीनी, नमस्कार ।”
उसकी सहेली ने उसको नहीं पहचाना और उसे आश्चर्य हुआ कि इस साधारण व्यक्ति ने उसको इतनी आत्मीयता से सम्बोधित किया। वह रुक-रुक कर बोली, “पर, श्रीमती मैं नहीं जानती – आप गलत समझ गई होंगी- “
“नहीं, मैं मटिल्डा लौसेल हूँ।”
उसकी सहेली आश्चर्य से चीखी। “ओह! मेरी बेचारी मटिल्डा ! तुम कैसे बदल गई हो। “
“हाँ, जब में आपसे मिली थी, तब से मुझे कुछ कठोर दिन काटने पड़े और कुछ मुसीबत भरे दिन – और यह सब आप के कारण……।”
” मेरे कारण ? वह कैसे?”
क्या आपको उस हीरों के हार की याद है जो आपने मुझे कमिश्नर के नृत्य में पहनने के लिए उधार दिया था?”
“हाँ, बहुत अच्छी तरह से । “
” ठीक, वह मुझसे खो गया था। “
“वह कैसे हुआ, चूँकि वह तो तुमने मुझे लौटा दिया था?”
“मैंने ठीक उसी जैसा दूसरा हार लौटाया था और उसका मूल्य चुकाने में हमें दस वर्ष लगे। आप समझ सकती हैं कि वह हमारे लिए आसान नहीं था जिनके पास कुछ भी नहीं था। पर वह बात समाप्त हो गई है और मैं समुचित रूप से सन्तुष्ट हूँ।”
श्रीमती फोरेस्टीयर को हैरानी हुई। उसने कहा, “तुम कहती हो कि मेरे हार के स्थान पर तुमने हीरों का हार खरीदा?”
“हाँ, आपने उसे उस समय नहीं देखा था? वे ठीक एक-दूसरे के समान थे।”
और वह गर्व और सामान्य ख़ुशी से मुस्कराई । श्रीमती फोरेस्टीयर का हृदय द्रवित हो गया और जैसे उसने उत्तर दिया उसने उसके दोनों हाथों को अपने हाथों में ले लिया, “ओह! मेरी बेचारी मटिल्डा, मेरा हार तो नकली था। वह पाँच सौ फ्रेंक से ज्यादा मूल्य का नहीं था।”
-गुई दे मॉपासां
Think about it
(इसके बारे में सोचिए )
Q.1. The course of Loisel’s life changed due to the necklace. Comment.
( हार के कारण लौसेल के जीवन का रास्ता बदल गया। टिप्पणी कीजिए।)
Ans. A tremendous change came in the life style of Loisel. She suffered poverty for ten years after replacing the false necklace with a genuine necklace. They changed their lodging style. Mme Loisel did all the cooking, rubbing and cleaning work. Mr Loisel worked evening and nights. They suffered for ten years. Thus a tremendous change came in the life style of Loisel’s family àfter the incident.
(लौसेल की जीवन-शैली में एक आश्चर्यजनक परिवर्तन आ गया। सही हार के स्थान पर झूठा हार देने के बाद भी उसे दस वर्ष गरीबी भोगनी पड़ी। उन्होंने अपने रहने की शैली बदल दी। मैडम लौसेल ने खाना बनाना, सफाई करना, बर्तन साफ करना जैसे काम स्वयं शुरू कर दिए। मिस्टर लौसेल ने रात-दिन काम किया। वे दस वर्ष तक परेशान रहे। इस प्रकार घटना के बाद लौसेल परिवार में आश्चर्यजनक परिवर्तन आया। )
Q.2. What was the cause of Matilda’s ruin ? How could she have avoided it?
(मटिल्डा के विनाश का क्या कारण था? वह इस विनाश से किस प्रकार बच सकती थी ? )
Ans. Too much ambition brings about disaster. Mme Matilda was too much ambitious. She brought about her ruin.
Matilda borrowed a super, necklace of diamond for the ball from the rich friend Jeanne. That necklace was the cause of Matilda’s ruin at the ball. The loss of the necklace was the cause of Matilda’s ruin.
When Matilda reached her home, she removed the wraps from her shoulders before the glass. Suddenly she found her necklace was not around her neck. When they couldn’t find the necklace, Matilda wrote to her friend that the clasp of the necklace had been broken and it would take time to return the jewel.
They spent thirty-six thousands francs to buy another necklace. Had she confessed that she had lost the necklace at the ball, she have avoided her ruin.
She hid the truth. She lacked the courage to confess the truth and ruined her life.
(अत्यधिक महत्त्वाकांक्षा विनाश का कारण होता है। श्रीमती मटिल्डा अत्यधिक महत्त्वाकांक्षी थी। उसने अपना विनाश कर लिया। मटिल्डा ने नृत्य के लिए अपनी धनी सहेली जीनी से हीरों का राजसी हार उधार लिया। वह हार नृत्य में खोया गया। उस हार का खोया जाना मटिल्डा के विनाश का कारण बना।
जब मटिल्डा अपने घर पहुँची, उसने दर्पण के सामने अपने कंधों से शाल हटाया। उसने अचानक देखा कि उसके गले में उसका हार नहीं है। जब वे हार की खोज नहीं कर सके, मटिल्डा ने अपनी मित्र को लिखा कि हार के नकसुए टूट गए हैं और आभूषण को लौटाने में समय लगेगा।
उन्होंने अन्य हार खरीदने के लिए छत्तीस हजार फ्रेंक खर्च किए। यदि वह अपना अपराध स्वीकार कर लेती कि उससे नृत्य में हार खो गया, वह अपने विनाश से बच सकती थी ।
उसने सच्चाई छिपाई । उसमें सच्चाई स्वीकार करने का साहस नहीं था और उसने अपना जीवन बरबाद कर लिया। )
Q. 3. What would have happened to Matilda if she had confessed to her friend that she had lost her necklace ?
(यदि मटिल्डा अपनी सहेली के सामने यह स्वीकार कर लेती कि उससे हार खो गया, तो क्या होता ? )
Ans. It needs courage to confess one’s mistake.
If : Matilda would have saved herself and her husband a great deal of trouble and could have prevented her ruin if only she had the courage to confess to Mme Forestier, that she had lost the necklace. If Matilda had been truthful with Mme Forestier she could have known then that the diamonds were false and would not have gone ahead and replaced them with real diamonds that cost Matilda her ruin. Matilda could easily have avoided a great deal of misery in her life by her confession. But Matilda chose to hide the truth from her. So she had to face a great of hardships and had to bad a horrible life for ten years.
Matilda was a discontented woman and she lacked the courage to speak the truth.
(अपनी गलती स्वीकार करने के लिए साहस की आवश्यकता होती है।
यदि – टिल्डा स्वयं को और अपने पति को बहुत अधिक कष्ट से बचा सकती थी और वह अपना विनाश रोक सकती थी। केवल यदि उसमें इतना साहस होता कि वह श्रीमती फोरेस्टीयर के सामने अपना अपराध स्वीकार कर लेती कि उससे हार खो गया है। यदि मटिल्डा श्रीमती फोरेस्टीयर से सच्चाई बता देती तो उसे ज्ञात हो जाता कि वे हीरे नकली थे और तब उसे आवश्यकता नहीं होती कि वह सच्चे हीरे खरीदती जिनकी कीमत मटिल्डा को अपने विनाश से चुकानी पड़ी। मटिल्डा अपने अपराध स्वीकार से बहुत अधिक मुसीबत से बच सकती थी। पर मटिल्डा ने सत्य को छिपाना उचित समझा। अत: उसे अत्यधिक कठिनाइयाँ सहन करनी पड़ीं और दस वर्ष तक भयावह जीवन व्यतीत करना पड़ा।
मटिल्ड, एक बेसब्र औरत थी और उसमें सत्य बोलने के साहस को अभाव था। )
Q.4. If you were caught in a situation like this, how would you have dealt with it?
(यदि तुम ऐसी स्थिति में आ जाओ तो उसका सामना कैसे करोगे ? )
Ans. If I were caught in such a situation I could have confessed before Mme Forestier at once. I could have done whatever she had asked me to do.
(यदि मैं ऐसी स्थिति में पड़ जाता तो मैं तत्काल श्रीमती फोरेस्टीयर के सम्मुख गलती स्वीकार कर लेता। और फिर मैं वही करता जो वह मुझसे करने को कहतीं । )
Talk about it
(इस बारे में बात कीजिए)
Q. 1. The character in this story speak in English. Do you think this is their language? What clues are there in the story about the language its characters must be speaking in?
(इस कहानी के पात्र अंग्रेजी बोल रहे हैं। क्या आप सोचते हैं कि यह उनकी भाषा है? कहानी में पात्रों की भाषा में जो वे बोल रहे हैं क्या संकेत है? )
Ans. The background of the story is English traditions. The story takes place in countryside of France. The traditions and customs clearly reveal that it is English background.
The dishes mentioned and the dress worn by them reflect English tradition. The currency mentioned is Francs. The whole setting of story gives a detailed view of the parties of Paris.
(कहानी की पृष्ठभूमि अंग्रेजी परम्पराएँ हैं। कहानी फ्रांस के ग्रामीण क्षेत्र में घटित होती है। परम्पराएँ और रीति-रिवाज स्पष्ट रूप से अंग्रेजी भूमिका को व्यक्त करते हैं।
जिस भोजन का उल्लेख किया गया है और जो वस्त्र उनके द्वारा पहने गए हैं अंग्रेजी परम्परा को व्यक्त करते हैं। फ्रेंक मुद्रा का उल्लेख किया गया है। कहानी के पूरे ताने-बाने में पेरिस की पार्टियों के विस्तृत दृश्य दिखाई देते हैं ।)
Q. 2. Honesty is the best policy.
(ईमानदारी सबसे अच्छी नीति है।)
Ans. This is a very common saying that ‘Honesty is the best policy’. There is no doubt in this saying. Man’s final goal should be contentment. It is the honest dealing which gives long lasting happiness. We should try to be honest in everything.
(यह एक सामान्य कहावत है कि ‘ईमानदारी सबसे अच्छी नीति है।’ कहावत में कोई सन्देह नहीं है। मनुष्य का अन्तिम लक्ष्य सन्तुष्टि होना चाहिए। ईमानदारी का व्यवहार अन्त तक प्रसन्नता देता है। हमें प्रत्येक चीज में ईमानदार होना चाहिए।)
Q.3. We should be content with what life gives us.
(हमें जो कुछ जिन्दगी देती है उससे सन्तुष्ट रहना चाहिए । )
Ans. We should be always content with what life gives us. We should never try to exceed our limit. The contentment is a must in life. Pomp and show is a wrong nature. Never be a borrower nor a lender.
( जीवन हमें जो कुछ देता है उससे हमें सदैव सन्तुष्ट रहना चाहिए। हमें अपनी सीमा कभी नहीं लाँघनी चाहिए। जीवन में सन्तुष्टि होना आवश्यक है। दिखावा करना गलत प्रकृति है। कभी कर्जदार न बनो और न साहूकार बनो । )

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